न्यूज़ डेस्क: पुरानी कहावत है- ‘बंद मुट्ठी लाख की, खुल गई तो खाक की।’ उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ ऐसा ही कुछ हुआ। बागी तेवर दिखाने का उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिला। उल्टे वे शीर्ष नेतृत्व की निगरानी में आ गए। बताया जा रहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पर्यवेक्षक बना कर उत्तराखंड भेजा जा रहा है। वहीं, शुक्रवार को राहुल गांधी ने राज्य के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद रावत से कहा कि पार्टी को चुनाव जितवा कर पहले बहुमत लाइए, इसके बाद मुख्यमंत्री तय होगा। चुनाव प्रचार का नेतृत्व हरीश रावत करेंगे।
उत्तराखंड कांग्रेस में पैदा हुए ताजा विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को यहां अपने आवास पर हरीश रावत समेत राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बुलाया। सूत्रों के मुताबिक राहुल ने एक-एक कर नेताओं से अलग-अलग बात की। इनमें रावत के अलावा उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, उपनेता करन महरा, सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व पीसीसी चीफ यशपाल आर्य और किशोर उपाध्याय तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव शामिल थे। सूत्र बता रहे हैं कि राहुल गांधी ने हरीश रावत और उनके समर्थकों की मंशा पर पानी फेरते हुए साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री का चेहरा अभी घोषित नहीं होगा। चुनाव जीतकर पार्टी बहुमत में आती है तो विधायक दल और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी मुख्यमंत्री तय करेंगे। हालांकि राहुल ने रावत से कहा कि चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष होने के नाते चुनाव प्रचार उन्हीं के नेतृत्व में होगा।





