बड़हलगंज: कछरांचल व दियारा क्षेत्रों में बिना मानसून की आई बाढ़ से हालात बिगड़ती जा रही है कछार क्षेत्र के दर्जनों से अधिक गांव के लोग अभी बाढ़ की मार से उबरे नही थे कि अचानक आई बाढ़ ने एक बार तबाही मचाना सुरु कर दी। पिछले माह बाढ़ की त्रासदी में इन किसानों के लहलहाती धान ज्वार-बाजरा, मक्के की फसलें सहित पशुओं के चारे सब बह गए थे।
बाढ़ की त्रासदी पर आप बीती सुनाते हुए हिंगुहार निवासी राम किसुन यादव का कहना है कि अचानक आई बाढ़ से गेंहू की बुआई समय से नही हो पाएगी लग रहा है कि हम लोगो को दोनों फ़सलो से हाथ धोना पड़ जायेगा। रामनगर डुमरी निवासी रामाश्रय सिंह गायघाट निवासी रामनयन साहनी का कहना है कि पिछले माह आई बाढ़ का पानी अभी खेत से निकला ही नही था कि तबतक एक बार फिर बाढ़ आ गयी खेती किसानी से जीवन यापन कर रहे हम किसानों के सामने बहुत बड़ी संकट आ गयी है ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि बिना मानसून के बाढ़ आ रही है।
बाढ़ की पानी से सबसे बुरा हाल हिंगुहार व विहुआ उर्फ अगिलगौवा सूबेदार नगर माझा है लोग जान जोखिम में डाल गर्दन भर पानी हेलते हुए दवा व बाजार करने चौरारे पर पहुच रहे है। पहले से ही क्षतिग्रस्त सड़कों पर पानी हेलते हुए आवागमन करना बहुत मुश्किल हो गया है। वही सरयू नदी के कटान से बगहा गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। बता दे कि बाढ़ खण्ड द्वारा कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है मगर बढ़ते जलस्तर से दिक्क्त बढ़ गयी है ।







