न्यूज़ डेस्क: पंजाब कांग्रेस की आपसी कलह अभी भी थमी नहीं है। टिकट बंटवारे को लेकर चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी को बड़ी माथापच्ची करनी पड़ रही है। हर सीट पर कई दावेदार हैं। कुछ वरिष्ठ नेताओं के करीबी रिश्तेदार कमेटी के लिए अलग समस्या बनते दिख रहे हैं। ‘एक परिवार, एक टिकट’ का फारमूला अपनाने की बात हो जरूर रही है, मगर, इससे अमल में लाने में मुश्किल नजर आ रही है। कुछ बड़े नेताओं की नाराजगी बढ़ सकती है।
पंजाब कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की शुक्रवार को यहां हुई बैठक महज आधे घंटे में ही खत्म हो गई। बताया गया कि कमेटी कुछ नामों पर चर्चा करने के बाद जब कुछ तय नहीं कर पा रही थी तो बैठक खत्म कर सभी बाहर निकल गए। अब अगली बैठक में फिर चर्चा होगी। बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख अजय माकन के अलावा, सुनील जाखड़ और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटें हैं, जिन पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अपने करीबी रिश्तेदारों को टिकट देने का दबाव बना रहे हैं। जबकि पार्टी एक फारमूला तय करने में लगी है कि एक परिवार से एक व्यक्ति को ही टिकट दिया जाए। लेकिन पार्टी के सामने मुश्किल यह आ रही है कि इससे कुछ नेताओं की नाराजगी बैठे-बैठाए मोल लेनी होगी। अभी जो हालात हैं, उसमें किसी भी नेता को नाराज करने का वक्त नहीं है। कांग्रेस से अलग हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसे ही मौके की ताक में हैं। कांग्रेस से नाराज होने वाले नेताओं को वे अपने पाले में लपकने की ताक में बैठे हैं।
वहीं, बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीब रहे विधायकों का टिकट काटने को कहा है। ऐसे करीब दर्जनभर विधायक हैं। अब उनकी जगह किसे टिकट दिया जाए, यह तय करना भी एक जोखिम भरा काम बन गया है। एक तो जिनके टिकट काटेंगे, उनके खिलाफ जिताऊ मजबूत प्रत्याशी देना होगा। दूसरा, टिकट कटने के बाद वे बागी प्रत्याशी के तौर पर या फिर विरोधी दल की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ उतरेंगे। स्क्रीनिंग कमेटी को इसका भी ध्यान रखते हुए टिकट तय करना है। बैठक खत्म होने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख अजय माकन ने कहा कि इस तरह की बैठक एक निरंतर प्रक्रिया है। सभी सीट पर चर्चा करते हैं और रणनीति बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सीटों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।







