न्यूज़ डेस्क: सूर्य नमस्कार को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और विश्व हिंदू परिषद आमने-सामने हो गए हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम से मुस्लिमों को परहेज करने को कहा है। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने इसे अलगाववादी भाव वाली अपील बताते हुए मुस्लिम समाज को इसे नजरंदाज करने को कहा है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रह़मानी ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि सूर्य नमस्कार के कार्यक्रमों में मुसलिम समुदाय के ब’चों को शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि सूर्य की उपासना करना इस्लाम धर्म के मुताबिक सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को इससे जुड़ा ‘दिशानिर्देशÓ वापस लेकर देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करना चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सूर्य उपासना को इस्लाम के विरुद्ध बताया
रहमानी के अनुसार भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 30 राज्यों में सूर्य नमस्कार की एक परियोजना चलाने का निर्णय किया है, जिसमें 30 हजार स्कूलों को पहले चरण में शामिल किया जाएगा। 1 जनवरी से 7 फरवरी 2022 तक के लिए यह कार्यक्रम किये जा रहे है और 26 जनवरी को सूर्य नमस्कार पर एक संगीत कार्यक्रम की भी योजना है।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने मंगलवार को सूर्य नमस्कार के कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के बच्चों को शामिल नहीं होने के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को ऐसी अंधेरी गलियों में ले जाने एवं अलगाववादी भाव वाली अपील को नजरंदाज करना चाहिए और जरूरत पडऩे पर ऐसे नेतृत्व को बदलना चाहिए।
विहिप ने कहा अलगाववादी भाव वाली अपील को मुस्लिम समाज नजरंदाज करे
जैन ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान में जिस भाषा का प्रयोग किया गया है, वह न केवल अलगवाव का भाव पैदा करते हैं बल्कि केंद्र सरकर के प्रति नफरत का निर्माण भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शायद यह उनकी मंशा भी है। उन्होंने कहा कि सूर्य नमस्कार एक ऐसा व्यायाम है जो सारे शरीर का विकास करता है। विहिप पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे में मुस्लिम समाज से हम अपील करते हैं कि वे ऐसी मूर्खतापूर्ण बातों पर ध्यान न दें और अपने विकास के मार्ग पर आगे बढ़ें।







