बड़हलगंज(संतोष जायसवाल): उपनगर के सरयू तट मुक्तिपथ शहीद स्मारक पर चल रहे सरयू अमृत महोत्सव 2021 के समापन सत्र में सम्पन्न हुए कवि सम्मेलन में देश के मशहूर कवियों दिनेश बावरा, चंदन राय, विनीता मिश्रा आदि ने अपनी कविताओं से भीषण ठंड के मौसम में जनसमूह को पूरे समय बांधे रखा। एक जलती चिता, दूसरी तरफ बह रही कविताओं की रसधार मानो प्रकृति का संदेश दे रही थी, रुको मत चलते रहो, तुम्हारे रुकने से संसार नही रुक सकता। एक ख़त्म होगा तो दूसरा नया आता रहेगा।
कवि सम्मेलन की मधुर शुरुआत कवियित्री विनीता मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज में हे माँ सरस्वती, तुम हमें वरदान दो.. किया।
इसके बाद मिन्नत गोरखपुरी ने आश्चर्य प्रकट करते हुये कहा कि “कमाल की बात है स्थान मुक्तिपथ है, और शुरुआत हिन्दू मुस्लिम एकता द्वार से है”। उन्होंने अपनी रचना “सजा कर अपने घर गीता और कुरान रखते है, जहां पर राम रखते हैं वही रहमान रखते है…! जीत जाता है सारी दुनियां से वह और आने बच्चों से हार जाता है! कुर्बानियों के दम पर जिंदा वतन हमारा है”। कानपुर से आये हास्यकवि हेमन्त पाण्डेय ने अपने शानदार अंदाज से जहां लोगों को गुदगुदाए रखा, वही अपने व्यंग रचनाओं से लोगों को अलग ही संदेश दिया। उनकी रचना “रामभक्तों को टीका लगेगा बहुत प्यार से, दंगाईयो को योगी जी निपटाएँगे मार से…” बड़हलगंज के ही युवा कवि निर्भय निनाद ने अपनी रचना “ठहर जाऊं दिलों में ठहराव वाला हूं, कड़कती धूप में भी मैं तो छांव वाला हूं। गमों में मुस्कराता, लड़का मैं गांव वाला हूं। उनकी रचना जिसमें सीमा पर खड़े एक सैनिक की पत्नी का संदेश “कभी पीछे न हटना सरहद के पाले से, जरूरत पड़े तो मेरी मांग का सिंदूर दे देना” लोगों ने खूब सराहा। गोला से आये कवि श्याम मोहन त्रिपाठी ने “क्यों दहेज की बलिवेदी पर…सुनाया तो मऊ जनपद से आई कवियित्री रीता तिवारी ‘रीत’ ने अपनी कविताओं “तुम्हारी इक अदा पर जन्म सौ बार वारेंगे,… मेरी आँखों मे नशा बन कर छा गए हो, नादानियों में प्यार का बढ़ता रहा अहसास…” सुना कर जनमानस को श्रृंगार रस का अहसास कराया। गोरखपुर निवासी देश के प्रख्यात स्तम्भकार, पत्रकार और कवि शैलेश मणि त्रिपाठी “मोबाइल बाबा” ने अपनी हास्यव्यंग रचनाओं से जनसमूह को श्रींगार से फिर हास्य की तरफ मोड़ा जिसे और परवान चढ़ा दिया वरिष्ठ कवि राम आधार व्याकुल की रचनाओं ने उनकी रचना “गंध बन कर बिखर जाइये” खूब सराही गयी तो भ्रूण हत्या उनकी भोजपुरी रचना “माई के कोखियाँ में सिसकेलि बेटिया, बैरी भइल संसार हो…” ने लोगों की आंख नम कर दिया। श्रृंगार, हास्य और व्यंग की इन प्रस्तुतियों को देशभक्ति की तरफ मोड़ा लखनऊ से आये वीररस के कवि अभय निर्भीक ने उनकी रचनाओं पर समूचा परिसर भारत माता की जय के नारों से कई बार गुंजायमान हुआ। उनकी रचना ” सीना ताने स्वाभिमान से सीमाओं पर हम रहते है, जब भी वतन ने मांगा…खूब पसंद आई। देश में रह कर देशविरोधी नारे लगाने वालों और उनके समर्थक नेताओं को ललकारती रचना …भारत मे भारत के कानूनों को अपनाना होगा खूब पसंद की गई। इसके बाद मुंबई से आये गीतकार चंदन राय के गीतों में जनसमूह मदहोश हो उठा उनकी रचना “रात भर तारीफ मैने की तुम्हारी, चाँद इतना जल गया कि सुन कर के सूरज हो गया” “देखता रहता है हर एक की हरकतें सूरज, इसिलिये लोग आंखे नही मिला पाते” लोगों को खूब पसंद आये। कवियित्री विनीता मिश्रा ने अपनी रचना “एक दिल हमारा एक दिल तुम्हारा, तोड़ दू मैं सारी रस्में…” की मधुर तान छेड़ा फिर अपनी भोजपुरी रचना “सुनी बचपनवां के सगरो कहानी, एगो रहे राजा, एगो रहे रानी” सुनाकर माँ की लोरियां, बचपन की यादें सब कुछ दूबारा याद करा दिया। अब आये देश के मशहूर कवि और व्यंगकार दिनेश बावरा जिन्होंने कवि सम्मेलन के संचनल की भी बागडोर संभाल रखी थी। उन्होंने देश की राजनीति, भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था, जातिगत कुरीतियों पर अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रहार भी किया और गुदगुदाया भी! उनकी रचना “रामधनी की बछिया और हम पैदा हुये थे एक ही दिन, …राम तो अपने आप में खुद ही एक प्रमाण हैं, न तेरा है न मेरा है यह हिंदुस्तान सबका है, मेरा भाई कुछ यूं रहा कुछ भाइयों के बीच जैसे एक दोहा कुछ चौपाइयों के बीच” ने लोगों की खूब तालियां बटोरी। राजनीति की वर्तमान हालात जब इसे खराब बताया जाने लगा हैं, पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति अगर अच्छे लोगो को टिकट देना शुरू कर दे तो यह बहुत बढ़िया हो जाएगी।
कार्यक्रम के बाद पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी ने कवियों का आभार प्रकट करते हुए सरयू अमृत महोत्सव के स्थगन की घोषणा किया।






