न्यूज़ डेस्क: राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्व भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल कल्याण सिंह अब इस दुनिया में भले नहीं रहें, लेकिन आज भी उनकी यादें जनता के दिलों में ताज़ी है। स्व० कल्याण सिंह जी का गोरखपुर जनपद से विशेष लगाव था। वह अक्सर गोरखपुर आते थें। बात वर्ष 2004 की है, जब वर्तमान भाजपा नेता व पंचायत प्रकोष्ट के प्रदेश संयोजक रमेश सिंह ने गोरखपुर आये पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी से कहा कि बाबूजी आपको बड़हलगंज “मुक्तिपथ” पर सेव का पौधा लगाना है।
सवाल सुनकर स्व० कल्याण सिंह जी ने तुरंत एक और सवाल मजाकिये अंदाज में पूछ दिया, ये मुक्तिपथ क्या है? जैसे ही रमेश सिंह ने उन्हें बताया कि है तो वह एक श्मशान, मगर बहुत मनोरम स्थल के रूप में विकसित हो रहा। इतना सुनते ही उन्होंने चेहरे पर मुस्कान के साथ कहा कि तुम लोग मुझे अभी श्मशान क्यों ले जाना चाहते हो, बिल्कुल नहीं, मैं अभी श्मशान नहीं जाऊँगा। और मौजूद सभी को हॅसने पर मजबूर कर दिया था। पूर्व मंत्री व मुक्तिपथ के अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी कहते हैं कि उस दिन वो आये थे पूरे लाव-लश्कर के साथ मानव काया के अंतिम पड़ाव “मुक्तिपथ” पर…मुक्तिपथ परिसर में मुख्य द्वार के पास लगा सेव का पौधा आज भी उनके आगमन की याद ताजा करता रहता है। पूरे सत्रह साल बाद आखिर नियति हम सबके प्रिय नेता को फिर श्मशान ले जा रही है। मगर इस बार वो वहाँ से वापस हम लोगों के बीच नहीं आ पायेंगे…लेकिन आज भी उनकी बातें हम लोगों के लिये प्रेरणाश्रोत है।
उनके आगमन के समय उस समय मौजूद रहें भाजपा नेता महेश उमर व शेखरचंद सर्राफ बताते हैं कि वह काफी मिलनसार व कार्यकर्ताओं की बातों को तहरिज देने वाले नेता थें। वह राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही शिक्षा को बढ़ावा देने वाले राजनेताओं में से एक थें।







