न्यूज़ डेस्क: महज कुछ घंटों में ही अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला तालिबान अब अपनी सरकार गठन करने के लिए बैठकों का दौर चला रहा है। हालांकि एकाएक सत्ता परिवर्तन में जहां कई लोग अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के देश छोड़कर भाग जाने और अफगानी सेना के सरेंडर करने को इस सबका कारण मान रहे हैं , वहीं दुनिया के कई मुल्क इस पूरे घटनाक्रम का कारण अमेरिका की नीतियों को मान रहे हैं । अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के कुछ ही समय बाद तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया, वह भी बिना कोई बड़ी लड़ाई किए । हालांकि बाइडेन ने अपने सैनिकों को वापस बुलाए जाने के फैसले को सही ठहराया है और कहा कि अफगानिस्तानी सेना की तालिबान के खिलाफ नहीं लड़ना चाहती तो हम क्यों अपने जवानों को वहां मरने दें।
बता दें कि हालिया घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कल देर रात अमेरिकी लोगों को अफगानिस्तान के हालात को लेकर लिए गए फैसलों के मद्देनजर संबोधित किया । उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से बुलाए जाने के अपने फैसले को सही ठहराया । साथ ही उन्होंने कहा कि जब अफगानिस्तान की सेना की नहीं लड़ना चाहती तो हम क्यों वहां अपने सैनिकों को मरने के लिए रहने दें।
बाइडेन ने 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को बुलाने का ऐलान किया था । अभी तक अमेरिका के करीब 95 फीसदी सैनिक वापस चले गए है , जिसे ध्यान में रखते हुए ही पिछले दिनों तालीबान ने एक्शन में आते हुए महज कुछ घंटों में पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।
पूरे घठनाक्रम पर बाइडेन ने कहा कि हमने अरबों रुपये अफगानिस्तान पर खर्च कर दिए । वहां करीब 3 लाख से ज्यादा जवानों को प्रशिक्षण दिया । इतना ही नहीं हमने मित्र देशों के साथ मिलकर भी काम किया । लेकिन इन सभी दावों से इतर , जिस तरह से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाया गया, उसने अफगानिस्तान के हालात बिगाड़ कर रख दिए । अब बाइडेन के फैसलों को लेकर दुनियाभर में उनकी आलोचना हो रही है।





