बड़हलगंज: बड़हलगंज: नेशनल कालेज आफ लाॅ के प्राचार्य डॉ अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि दो विश्व युद्ध होने के बाद जब मानवता तार तार हो गई तो चारो तरफ अशांति का माहौल बन गया। तब विश्व के राष्ट्राध्यक्षो ने बैठक कर पुनःयुद्ध न हो,शांति कायम रहे इसे ध्यान मे रखकर संयुक्त राष्ट्र का निर्माण किया साथ हो मानवाधिकार को चार्टर मे स्थान दिया। जिसे 10 जुलाई1948 को अंगीकार किया गया।
शुक्रवार को कालेज में मानवाधिकार दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि मानव के वो अधिकार जो जन्म के साथ ही मिला है। उसके महत्व को समझना चाहिए। भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन 1993 में किया गया। जो अपने कार्यों को बखूबी निभा रहा है। मुख्य नियंता चन्द्र भूषण तिवारी ने कहा कि मानवाधिकार दिवस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन समाज में दुर्बल व्यक्तियों को न्याय दिलाने,लोगों को जागरूक करने,व मानवाधिकार के बढ़ते हुए कार्यों अधिकारों व कर्तव्यों को लागू करने का है। डॉ सरिता गुप्ता ने कहा कि हमें अपने कार्यों को नियंत्रित रखना चाहिए जिससे किसी के अधिकारों का हनन न हो और समाज में सभी गरीब दुर्बल लोग स्वतन्त्रता का अनुभव कर सके,जिससे उनके अधिकार सुरक्षित रहें। प्रवक्ता फकरुद्दीन ने कहा कि समाज में सभी वर्गों के लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें और सभी मानव के प्रति मानवता का भाव रखें।
इसी क्रम में कालेज के छात्र/ छात्राओं ने “मानवाधिकार और वैश्विक चुनौतियाँ” पर दीपक तिवारी, जागृति, खुशबू, मिताली, सतीश, दिव्या तिवारी, अंशु यादव, आशीष, कुशाग्र ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए। वहीँ शिवम् गुप्ता ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष विभिन्न चुनौतियों को बताते हुए आयोग में सुधारात्मक प्रयास करने पर जोर दिया और उपस्थित सभी छात्रों से अपने आस पास के लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से जागरूक करने को कहा। कार्यक्रम का संचालन छात्र इमरान ने किया। कार्यक्रम के अंत में सीडीएस विपिन रावत सहित दुर्घटना में 13 नौजवानों की मृत्यु पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई।







