बड़हलगंज: सूर्यदेव के आराधना का महापर्व सूर्य षष्ठी (छठ) बुधवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर पुत्रों के लंबी उम्र की कामना की। सरयू तट पर अर्ध्य देने के लिए हजारों महिलाओं के साथ ही पुरुषों का हुजूम उमड़ पड़ा। अर्घ्य देने के बाद नदी में प्रवाहित किए दीपों का विहंगम दृश्य देखते ही बन रहा था। गुरुवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही चार दिवसीय इस महापर्व का समापन होगा।
दोपहर बाद से ही नगर से लेकर ग्रामीण इलाके के श्रद्धालु सिर पर पूजा सामग्री लेकर नदी की तरफ चल पड़े। शाम होते-होते हजारों श्रद्धालु इकट्ठा हुए। छठ मईया का गीत गाती महिलाओं का समूह मनोहारी छटा बिखेर रहा था। आलम यह था कि लोग कोरोना संक्रमण को भूल ही गये और तट पर तिल रखने तक की जगह नहीं बची। महिलाएं वेदी पूजन के बाद नदी में सामने खड़ी होकर सूर्यदेव के अस्त होने का इंतजार करने लगी। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर के साथ ही पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। हालांकि इस बार सरयू नदी का जलस्तर अधिक होने के कारण कई घाटों पर लोगों को परेशानी भी हुई।
उपनगर के मुक्तिपथ, कलूट शाह शिवाला घाट, लेटाघाट, लक्ष्मीनारायण घाट, पुरानी हनुमानगढ़ी सहित ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम दोपहर दो बजे से ही उमड़ने लगा था। नगर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए नगर से लेकर नदी तट तक पथ प्रकाश की व्यवस्था कराई गई थी। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर तरफ निगरानी की जा रही थी। स्वयं कोतवाल उमेश उपाध्याय पुलिस बल के साथ हर घाटों की निगरानी कर रहें थें।
आस्था के आगे धूमिल हुआ कोरोना
लोक आस्था के महापर्व छठ के आगे किसी भी श्रद्धालु में कोरोना संक्रमण का खौफ नहीं दिखाई दिया। न सिर्फ सामजिक दुरी का मानक टुटा अपितु कुछ लोगों को छोड़ किसी भी श्रद्धालुं ने मास्क लगाना भी उचित नहीं समझा। हालांकि कोरोना संक्रमण के बाद यह दूसरी बार छठ पर्व मनाया गया। इस बार अच्छी बात यह रही कि काफी मात्रा में लोगों ने कोविड का टीका ले लिया है।







