न्यूज़ डेस्क: विश्व आज भी आतंकवाद, हिंसा व कट्टरवाद की गंभीर समस्याओं से घिरा है। इन्हीं कारणों से अब भी हमें ऐसे दमनकारी शासक व असहिष्णु समाज पनपते दिख जाते हैं जो अपने ही लोगों का धार्मिक कट्टरवाद के नाम पर शोषण करते हैं। अफगानिस्तान में तालिबान ऐसी ही परिस्थितियों का नवीन उदाहरण बनकर उभरा है। जो वैश्विक आतंकवाद द्वारा हमारे अस्तित्व को दी जा रही चुनौती की एक अभिव्यक्ति है। वैश्विक आतंकवाद के विरूद्ध आध्यात्मिक मूल्यों को हम अपना उपकरण बनाएं।
वैश्विक आतंकवाद के विरूद्ध आध्यात्मिक मूल्यों को बनाएं उपकरण : इंद्रेश कुमार
यह बात कांस्टीट्यूशन क्लब में वैश्विक आतंकवाद बनाम मानवीयता, शांति एवं संभावनाएं कट्टरवाद एक विभाजन रेखा विषय पर होने जा रहे सम्मेलन के लिए आयोजित हुई वार्ता में आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि अगर फारूख अब्दुल्ला को भारत में रहने में अजीब लगता है तो वह लंदन अपनी पत्नी के पास जाकर रह सकते हैं। वहीं ज्ञानवापी मस्जिद मसले पर उन्होंने कहा कि काशी मथुरा या देश में कहीं का भी जो मुसलमान है उसने कभी मंदिर-मूर्ति तोडक़र मस्जिद बनाने की हरकत नहीं की।
11 दिस. को इंडिया हैबीटेट सेंटर में ‘कट्टरवाद : एक विभाजन रेखा’ सम्मेलन होगा आयोजन
देश में यह कार्य विदेशी आक्रांताओं ने आकर किया था। उन्होंने ताजा नागालैंड खदान कामगारों की मौत के मसले पर कहा कि इस घटना पर जिस तरह से चर्चा की जा रही है इसी तरह महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल पर भी चर्चा की जानी चाहिए। इस मौके पर विश्वग्राम की अध्यक्ष प्रो. गीता सिंह ने कहा कि यह एक विडम्बना है कि लाखों मुसलामानों का घर, अनेक संस्कृतियों का संगम है, व एशिया की अर्थव्यवस्था का एक इंजन होने के बावजूद दक्षिण एशिया आज भी इस्लामी कट्टरपंथियों व उनकी आतंकी गतिविधियों के प्रति अनुकूल है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का 11 दिसम्बर को इंडिया हैबीटेट सेंटर में सुबह 9 बजे से आयोजन किया जाएगा।







